श्रावणी मेला: देवघर की पवित्र तीर्थयात्रा

श्रावणी मेला भारत के सबसे महत्वपूर्ण और सबसे लंबे धार्मिक मेलों में से एक है, जो श्रावण के पवित्र महीने के दौरान आयोजित होता है। जबकि गंतव्य, बैद्यनाथ धाम, झारखंड में है, तीर्थयात्रा का प्रारंभिक बिंदु और आत्मा बिहार में निहित है। लाखों भक्त, जिन्हें 'कांवरिया' के रूप में जाना जाता है, 100 किमी से अधिक की पैदल यात्रा करते हैं। यह भागलपुर क्षेत्र के लिए एक प्रमुख कार्यक्रम है और यह बिहार के त्योहार में से एक है।,तीर्थयात्रा बिहार के भागलपुर जिले के सुल्तानगंज से शुरू होती है, जहाँ गंगा उत्तर की ओर बहती है, एक ऐसी विशेषता जिसे अत्यधिक शुभ माना जाता है। कांवरिया नदी से छोटे बर्तनों में पवित्र जल एकत्र करते हैं, जिसे वे 'कांवर' नामक एक सजे हुए स्लिंग का उपयोग करके अपने कंधों पर ले जाते हैं।,वे नंगे पैर चलते हैं, 'बोल बम' का जाप करते हुए, देवघर तक बैद्यनाथ मंदिर में शिवलिंग का अभिषेक करने के लिए। पूरा मार्ग केसरिया के समुद्र में बदल जाता है, जिसमें स्वयंसेवक और स्थानीय समुदाय तीर्थयात्रियों को भोजन, पानी और चिकित्सा सहायता प्रदान करने के लिए शिविर लगाते हैं। श्रावणी मेला आस्था, सहनशक्ति और सामुदायिक सेवा का एक अद्वितीय तमाशा है, जो भक्ति की तीव्रता में पितृ पक्ष मेला और महा शिवरात्रि समारोहों के समान है।
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