अनंत चतुर्दशी: आस्था और सुरक्षा का त्योहार

अनंत चतुर्दशी भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष के 14वें दिन मनाया जाने वाला एक हिंदू त्योहार है। यह मुख्य रूप से भगवान विष्णु के 'अनंत' रूप को समर्पित है। बिहार में, यह त्योहार उपवास और विशिष्ट अनुष्ठानों के साथ मनाया जाता है। भगवान विष्णु की पूजा पितृ पक्ष मेला में विष्णुपद मंदिर में भी केंद्रीय है।,मुख्य अनुष्ठान में भगवान विष्णु की पूजा और 'अनंत' नामक एक पवित्र धागे को बांधना शामिल है। यह धागा, जिसमें 14 गांठें होती हैं, पूजा के दौरान पवित्र किया जाता है और फिर पुरुषों द्वारा उनकी दाहिनी बांह पर और महिलाओं द्वारा उनकी बाईं बांह पर बांधा जाता है। माना जाता है कि यह सभी बुराइयों के खिलाफ एक सुरक्षात्मक आकर्षण के रूप में कार्य करता है और समृद्धि लाता है।,भक्त उपवास रखते हैं और 'अनंत व्रत कथा' सुनते हैं, जो धागे की शक्ति की कहानियों का वर्णन करती है। यह त्योहार दस दिवसीय गणेश चतुर्थी उत्सव के बाद गणेश मूर्तियों के विसर्जन के दिन के रूप में भी लोकप्रिय है, हालांकि यह भारत के अन्य हिस्सों में अधिक प्रमुख है। बिहार में, ध्यान भगवान विष्णु की पूजा और अनंत के पवित्र धागे पर बना रहता है, एक भक्ति जो विवाह पंचमी के दौरान भी देखी जाती है।
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