बिहार में चित्रगुप्त पूजा की परंपरा

चित्रगुप्त पूजा बिहार और भारत के अन्य हिस्सों में कायस्थ समुदाय द्वारा मनाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण त्योहार है। यह भाई दूज के दिन ही मनाया जाता है, जो दिवाली के दो दिन बाद होता है। यह त्योहार भगवान चित्रगुप्त को समर्पित है, जो हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, सभी मनुष्यों के कर्मों के दिव्य रिकॉर्ड-कीपर हैं।,चूंकि चित्रगुप्त साक्षरता और ज्ञान से जुड़े हैं, इसलिए यह त्योहार कलम और किताबों की पूजा पर बहुत जोर देता है। इस दिन, कायस्थ समुदाय के सदस्य, जो पारंपरिक रूप से लेखक और प्रशासक रहे हैं, कलम और स्याही का उपयोग करने से परहेज करते हैं। वे अपने लेखन उपकरणों की पूजा करते हैं, उन्हें देवता को अर्पित करते हैं और ज्ञान और एक धर्मी जीवन के लिए उनका आशीर्वाद मांगते हैं।,पूजा में भगवान चित्रगुप्त की एक छवि बनाना, प्रार्थना करना और 'चित्रगुप्त कथा' पढ़ना शामिल है। यह एक अनूठा त्योहार है जो शिक्षा, जवाबदेही और लिखित शब्द की शक्ति के महत्व का जश्न मनाता है, जो समुदाय के भीतर एक गहरे सांस्कृतिक मूल्य को दर्शाता है, जैसे सरस्वती पूजा में ज्ञान के प्रति श्रद्धा।
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