सुजनी कढ़ाई: बिहार की रजाई कला

✍️ Priya Singh
📅 15 अक्टूबर 2025📂 Art & Culture📍 muzaffarpur
सुजनी कढ़ाई: बिहार की रजाई कला
सुजनी, बिहार के मुजफ्फरपुर के भुसारा गांव से उत्पन्न कढ़ाई का एक पारंपरिक रूप है। इस शिल्प में पुरानी साड़ियों और धोतियों की परतों को एक साधारण रनिंग स्टिच के साथ सिलकर रजाई बनाना शामिल है। 'सुजनी' शब्द स्वयं 'सु' (आसान) और 'जनी' (जन्म) से लिया गया है, क्योंकि ये रजाई पारंपरिक रूप से नवजात शिशुओं को लपेटने के लिए बनाई जाती थीं। इस शिल्प को भौगोलिक संकेत (जीआई) टैग मिला है, जैसा कि बिहार के जीआई-टैग वाले उत्पाद में विस्तृत है।,जो चीज सुजनी को अनूठा बनाती है, वह है इसका कथात्मक पहलू। रजाई पर की गई कढ़ाई केवल सजावटी नहीं है; यह कहानियां कहती है। महिला कारीगर अपने दैनिक जीवन, गांव की घटनाओं, सामाजिक मुद्दों और पौराणिक कथाओं के दृश्यों को चित्रित करने के लिए रंगीन धागों का उपयोग करती हैं। रूपांकन सरल लेकिन अभिव्यंजक होते हैं, जो एक शक्तिशाली दृश्य कथा बनाते हैं।,हाल के वर्षों में, विभिन्न संगठनों और डिजाइनरों के प्रयासों की बदौलत इस शिल्प में एक पुनरुद्धार देखा गया है। सुजनी कढ़ाई का उपयोग अब साड़ियों, दुपट्टों, दीवार पर लटकाने वाली वस्तुओं और कुशन कवर सहित उत्पादों की एक विस्तृत श्रृंखला पर किया जा रहा है, जिससे यह सुंदर और सार्थक कला रूप, जैसे खतवा, वैश्विक दर्शकों तक पहुंच रहा है।
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