अहिंसा की विरासत: दुनिया को बिहार का उपहार

✍️ A. K. Sharma
📅 15 अक्टूबर 2025📂 History
अहिंसा की विरासत: दुनिया को बिहार का उपहार
अहिंसा का सिद्धांत, या सभी जीवित प्राणियों के प्रति अहिंसा, दुनिया के लिए भारत के सबसे बड़े दार्शनिक योगदानों में से एक है, और इसकी जड़ें बिहार की मिट्टी में गहरी हैं। यह प्राचीन भूमि गौतम बुद्ध और भगवान महावीर, दोनों अहिंसा के महान प्रेरितों के लिए 'कर्मभूमि' थी।,गौतम बुद्ध ने बोधगया में बोधि वृक्ष के नीचे ज्ञान प्राप्त किया और राजगीर और वैशाली जैसे स्थानों में अपने कई प्रमुख उपदेश दिए। उनकी शिक्षाओं ने करुणा और मध्य मार्ग के माध्यम से दुख की समाप्ति पर जोर दिया। इसी तरह, 24वें जैन तीर्थंकर, भगवान महावीर, का जन्म वैशाली में हुआ और उन्होंने पावापुरी में निर्वाण प्राप्त किया। उन्होंने अहिंसा के और भी कड़े रूप का प्रचार किया, जिससे यह जैन धर्म का केंद्रीय सिद्धांत बन गया।,अहिंसा की यह विरासत सदियों तक गूंजती रही। खूनी कलिंग युद्ध के बाद, सम्राट अशोक ने बौद्ध धर्म अपनाया और अहिंसा को एक राज्य नीति बनाया। 20वीं शताब्दी में, महात्मा गांधी ने अपने पहले सत्याग्रह, जो पूरी तरह से अहिंसक प्रतिरोध के सिद्धांतों पर आधारित एक आंदोलन था, को शुरू करने के लिए बिहार में चंपारण को चुना। इस प्रकार, बिहार अहिंसा की स्थायी प्रासंगिकता का एक शक्तिशाली प्रतीक बना हुआ है।
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