गोना की परंपरा: दुल्हन के लिए एक दूसरी विदाई

✍️ Priya Singh
📅 15 अक्टूबर 2025📂 Knowledge
गोना की परंपरा: दुल्हन के लिए एक दूसरी विदाई
गोना एक अनूठा विवाह के बाद का समारोह है जो कभी बिहार और उत्तर भारत के अन्य हिस्सों में व्यापक रूप से प्रचलित था। यह अनिवार्य रूप से एक दूसरे विवाह समारोह के रूप में कार्य करता था, जो दुल्हन के अपने वैवाहिक घर के लिए अंतिम प्रस्थान का प्रतीक था। यह बड़े बिहारी विवाह अनुष्ठान का एक हिस्सा है।,इस परंपरा की जड़ें बाल विवाह की ऐतिहासिक प्रथा में हैं। जब लड़कियों की बहुत कम उम्र में शादी कर दी जाती थी, तो वे शादी के बाद भी अपने माता-पिता के साथ रहती थीं। गोना समारोह कुछ साल बाद किया जाता था, जब दुल्हन यौवन तक पहुंच जाती थी और उसे अपना वैवाहिक जीवन शुरू करने के लिए तैयार माना जाता था।,गोना शादी की तरह ही विस्तृत था, जिसमें अनुष्ठान, दावत और एक दूसरी, अधिक भावनात्मक 'विदाई' शामिल थी। जबकि बाल विवाह की प्रथा को कानूनी रूप से समाप्त कर दिया गया है और गोना समारोह दुर्लभ हो गया है, यह बिहार के सामाजिक इतिहास का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बना हुआ है, जो समय के साथ वैवाहिक रीति-रिवाजों के विकास को दर्शाता है, जैसे दहिना समारोह।
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